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बिजली विभाग की बेशर्मी : 10 दिन से अंधेरे मे रायकोना, सवाल पूछने पर JE ने पत्रकार को भेजा अमरीका

सारंगढ़(पेंड्रावन)संवाददाता-चित्रसेन घृतलहरे, 22 मार्च 2025// क्या सरसींवा का बिजली विभाग नींद में है या जानबूझकर जनता को अंधेरे में धकेल रहा है? रायकोना गांव के लोग पिछले 10 दिनों से बिजली के बिना जीने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मस्ती में डूबे हुए हैं। शिकायत करने पर ग्रामीणों को टालमटोल भरे जवाब दिए जा रहे हैं, और अब तो हद ही हो गई—जब पत्रकार ने JE से सवाल किया, तो उसने समस्या सुलझाने के बजाय पत्रकार को अमेरिका भेजने की सलाह दे डाली! क्या यह किसी सरकारी अधिकारी का काम है ?

क्या बिजली विभाग के अफसरों को जनता की तकलीफों से कोई मतलब नहीं ?

बारिश हो या मामूली खराबी, सरसींवा क्षेत्र के गांवों में बिजली काट देना यहां का नियम बन चुका है। लेकिन इस बार रायकोना के लोग पूरा 10 दिन से अंधेरे में जी रहे हैं। शिकायतें करने के बाद भी न कोई हलचल है, न कोई सुधार। गांव के लोग मजबूर हैं—पढ़ाई बंद, घर का काम ठप, और रातों को जागकर बिताने की नौबत आ गई है।

JE की बदतमीजी: समस्या सुलझाने की जगह उल्टा जवाब!

जब एक पत्रकार ने इस मामले में JE से जवाब मांगा, तो उसने मजाक उड़ाने वाले जवाब देने शुरू कर दिए। जनता की परेशानियों को हल करने के बजाय, JE खुद को बचाने में लगा रहा और उल्टे सवाल दागने लगा। क्या बिजली विभाग के अधिकारी अब जनता और मीडिया को गुमराह करेंगी उदाहरण अमेरिका का दिया जायेगा?

कितना गिरेंगे ये लोग ?

ग्रामीणों का कहना है कि हर छोटी सी खराबी पर 24 से 48 घंटे तक बिजली काट दी जाती है। लेकिन इस बार तो हद हो गई! 10 दिन से पूरा गांव अंधेरे में डूबा है, और अधिकारी मौज कर रहे हैं। क्या सरकार की तरफ से इन अधिकारियों को जनता को परेशान करने का ठेका मिला हुआ है?

चेतावनी: अब होगा बड़ा आंदोलन!

गांव के लोग अब गुस्से में हैं और बड़े आंदोलन की तैयारी में हैं। ग्रामीणों ने कहा कि अगर 24 घंटे के अंदर बिजली सुचारू नहीं हुई, तो सड़क जाम, विरोध प्रदर्शन और बिजली विभाग का घेराव किया जाएगा।

सरकार जागे या फिर…?

सरकार को अब तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करना होगा और JE समेत पूरी बिजली विभाग की टीम पर कड़ी कार्रवाई करनी होगी। अगर अब भी सरकार ने अनदेखी की, तो जनता अपने हक के लिए बड़ा कदम उठाने को मजबूर होगी। अब देखना यह है कि सरकार जनता के साथ है या लापरवाह अफसरों के?

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